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Monday, August 31, 2020

SEBI has changed the rule of margin from September 1

 सेबी ने मार्जिन का नियम 1 सितंबर से बदल रहा है आप शेयर ट्रेडिंग करते हैं जानना आपके लिए जरूरी है

Upfront margin to broker  के तौर पर जितना पैसा दिया होगा उतने के ही खरीद सकेंगे शेयरहर निवेशक के डीमैट अकाउंट में रहेगा शेयर, प्लेजिंग में ब्रोकर की भूमिका कम हो जायेगी

शेयर बाजार में 1 सितंबर से आम निवेशकों के लिए नियम बदलने वाले हैं। अब वे broker की ओर से मिलने वाली margin का लाभ नहीं उठा सकेंगे। जितना पैसा वे Upfront margin के तौर पर broker  को देंगे, उतने के ही शेयर खरीद सकेंगे। इसे लेकर कई शेयर broker  आशंकित है कि वॉल्युम नीचे आ जाएगा। आइए समझते हैं क्या है यह नया नियम और आपकी ट्रेडिंग को किस तरह प्रभावित करेगा?

सबसे पहले, यह margin क्या है?

शेयर मार्केट में अपफ्रंट margin सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से एक है। यह वह न्यूनतम राशि या सिक्योरिटी होती है जो ट्रेडिंग शुरू करने से पहले निवेशक स्टॉक ब्रोकर को देता है। वास्तव में यह राशि या सिक्योरिटी, बाजारों की ओर से broker  से Upfront वसूली जाने वाली राशि का हिस्सा होती है। यह इक्विटी और Commodity derivatives में ट्रेडिंग से पहले वसूली जाती है । इसके अलावा स्टॉक्स में किए गए कुल निवेश के आधार पर 

Brokerage हाउस भी निवेशक को मार्जिन देते थे। यह margin Brokerage हाउस निर्धारित प्रक्रिया के तहत तय होती थी।इसे ऐसे समझिए कि निवेशक ने एक लाख रुपए के स्टॉक्स खरीदे हैं। इसके बाद भी Brokerage हाउस उसे एक लाख से ज्यादा के स्टॉक्स खरीदने की अनुमति देते थे। Upfront margin में दो मुख्य बातें शामिल होती हैं, पहला वैल्यू एट रिस्क (VAR) और दूसरा एक्स्ट्रीम लॉस मार्जिन (ELM)। इसी के आधार पर किसी निवेशक की मार्जिन भी तय होती है।

अब तक क्या है मार्जिन लेने की प्रक्रिया?

margin दो तरह की होती है। एक तो है कैश margin। यानी आपने जितना पैसा आपके ब्रोकर को दिया है, उसमें कितना सरप्लस है, उतने की ही ट्रेडिंग आप कर सकते हैं।दूसरी है स्टॉक margin। इस प्रक्रिया में ब्रोकरेज हाउस आपके डीमैट अकाउंट से स्टॉक्स अपने अकाउंट में ट्रांसफर करते हैं और क्लियरिंग हाउस के लिए प्लेज मार्क हो जाती है।इस सिस्टम में यदि कैश margin के ऊपर ट्रेडिंग में कोई नुकसान होता है तो क्लियरिंग हाउस प्लेज मार्क किए स्टॉक को बेचकर राशि वसूल कर सकता है।

नया सिस्टम किस तरह अलग होगा?

सेबी ने margin ट्रेडिंग को नए सिरे से तय किया है। अब तक प्लेज सिस्टम में निवेशक की भूमिका कम और ब्रोकरेज हाउस की ज्यादा होती थी। वह ही कई सारे काम निवेशक की ओर से कर लेते थे।नए सिस्टम में स्टॉक्स आपके अकाउंट में ही रहेंगे और वहीं पर क्लियरिंग हाउस प्लेज मार्क कर देगा। इससे ब्रोकर के अकाउंट में स्टॉक्स नहीं जाएंगे। margin तय करना आपके अधिकार में रहेगा । प्लेज ब्रोकर के फेवर में मार्क हो जाएगी। ब्रोकर को अलग डीमैट अकाउंट खोलना होगा- ‘टीएमसीएम- क्लाइंट सिक्योरिटी margin प्लेज अकाउंट’। यहां टीएमसीएम यानी ट्रेडिंग मेंबर क्लियरिंग मेंबर।

तब ब्रोकर को इन सिक्योरिटी को क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के फेवर में री-प्लेज करना होगा। तब आपके खाते में अतिरिक्त margin मिल सकेगी । यदि margin में एक लाख रुपए से कम का शॉर्टफॉल रहता है तो 0.5% पेनल्टी लगेगी। इसी तरह एक लाख से अधिक के शॉर्टफॉल पर 1% पेनल्टी लगेगी। यदि लगातार तीन दिन margin शॉर्टफॉल रहता है या महीने में पांच दिन शॉर्टफॉल रहता है तो पेनल्टी 5% हो जाएगी।

नई व्यवस्था में आज खरीदो, कल बेचो (BTST) का क्या होगा?

शेयर मार्केट में बीटीएसटी प्रचलित टर्म है, जब निवेशक आज किसी शेयर को खरीदता है और दूसरे ही दिन उसे बेच देता है। नए नियम से यह प्रक्रिया बदलने वाली है।यदि अगले ही दिन आपको स्टॉक बेचना है तो आपको VAR + ELM margin चाहिए होगी। यदि एक लाख रुपए का रिलायंस स्टॉक आपने आज खरीदा, आपको उसे बेचने के लिए 22 हजार रुपए की मार्जिन कल आपके अकाउंट में रखनी ही होगी । ब्रोकर्स ने इसका भी रास्ता निकाला है। यदि आपने आज कोई शेयर खरीदा और उसका पूरा भुगतान ब्रोकर को किया है तो भी ब्रोकर एक्सचेंज को VAR + ELM ही चुकाएगा। इससे आपके पास अगले दिन उस स्टॉक को बेचने के लिए पर्याप्त margin होगी।


उदाहरण के लिए, यदि आपके एक लाख रुपए है और आपने रिलायंस खरीदा। ब्रोकर VAR + ELM के तौर पर 22 हजार रुपए ब्लॉक करेगा और रिपोर्ट करेगा। इस तरह, अगले दिन एक लाख रुपए का रिलायंस बेचने के लिए बचे हुए 78 हजार में से आपको margin मिल जाएगी।

बीटीएसटी ट्रेड्स की अनुमति देने के लिए कुछ ब्रोकर्स ने यह रास्ता निकाला है। लेकिन यह उन्हीं स्टॉक्स पर उपलब्ध है जिन पर वीएआर+ईएलएम 50% से कम है। चूंकि, टॉप 1,500 स्टॉक्स की वीएआर+ईएलएम 50% से कम है, इस वजह से बीटीएसटी संभव हो सकेगा

इसका निवेशकों को क्या फायदा होगा?

सेबी को नया नियम लाना पड़ा क्योंकि प्लेज किए जाने वाले स्टॉक्स के ट्रांसफर ऑफ टाइटल (ऑनरशिप) को लेकर दिक्कतें थी। कुछ ब्रोकर्स ने इसका दुरुपयोग किया।चूंकि, स्टॉक्स निवेशक के डीमैट खाते में ही रहेंगे, ब्रोकर इन सिक्योरिटी या स्टॉक का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। एक क्लाइंट के स्टॉक को प्लेज कर दूसरे क्लाइंट की margin बढ़ाना उनके लिए संभव नहीं होगा।

मौजूदा प्लेज सिस्टम में स्टॉक्स ब्रोकर के कोलेटरल अकाउंट में होते थे, इसलिए उस पर मिलने वाले डिविडेंड, बोनस, राइट्स आदि का लाभ ब्रोकर उठा लेता था। अब ऐसा नहीं हो सकेगा । सभी सिक्योरिटी पर प्लेज की अनुमति होगी क्योंकि कुछ ब्रोकर एक्सचेंज से अनुमति होने के बाद भी कई सिक्योरिटी पर प्लेज स्वीकार नहीं करते थे।निवेशकों को क्या नुकसान है?

भारत में आम तौर पर स्टॉक्स के सेटलमेंट में दो दिन लगते हैं। यानी आप स्टॉक खरीदते हैं तो आपके डीमैट अकाउंट में उसे आने में दो दिन (T+2) लग जाते हैं। इसी तरह स्टॉक बेचने पर उसका क्रेडिट अकाउंट में पहुंचने में दो दिन लग जाते हैं।यदि आपने एक लाख रुपए के शेयर बेचे और उसी दिन कुछ और खरीदना चाहते हैं तो नहीं खरीद सकेंगे। आपको प्लेज करना होगा और margin लेनी होगी। अब तक ब्रोकर बिक्री पर नोशनल कैश दे देते थे, जिससे उसी दिन दूसरा शेयर खरीदा जा सकता था।

नई व्यवस्था में नोशनल कैश की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इस वजह से आपको बेचने पर उसका पैसा क्रेडिट होने का इंतजार करना होगा। उसके बाद ही आप कोई शेयर खरीद सकेंगे। अन्यथा आपको अपने अकाउंट के शेयर प्लेज कर मार्जिन जुटानी होगी।

ब्रोकरिंग हाउसेस को चिंता है कैश और डेरिवेटिव्स सेग्मेंट में मार्केट और उनके खुद के टर्नओवर कम होने की। उन्हें लग रहा है कि डेली टर्नओवर 20-30% कम हो जाएगा । क्लाइंट्स को अपने अकाउंट में हायर margin बनाकर रखनी होगी और इससे उनके रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट पर भी असर पडे़गा। उनकी रिस्क लेने की क्षमता भी कम हो जाएगी । इस बदलाव से न केवल ब्रोकर्स को बल्कि सरकार को भी नुकसान होगा। सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) के तौर पर सरकार को मिलने वाला राजस्व कम होगा।

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Saturday, August 29, 2020

unlock 4 guidelines allowed metro social academic events

 अनलॉक-4 के लिए गाइडलाइन जारी :-7 सितंबर से मेट्रो शुरू होगी, 21 सितंबर से धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में 100 लोग शामिल हो सकेंगे; 30 सितंबर तक स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे कंटेनमेंट जोन में 30 सितंबर तक लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाएगाकिसी को भी देश में कहीं भी जाने के लिए अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी

भारत सरकार ने अनलॉक-4 के लिए शनिवार शाम गाइडलाइन जारी कर दी। यह 30 सितंबर तक लागू रहेंगी। इसके तहत, 7 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से मेट्रो रेल शुरू करने की अनुमति होगी। 21 सितंबर से सोशल सामाजिक, अकादमिक, स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट, कल्चरल, धार्मिक, राजनीतिक और धार्मिक समेत अन्य आयोजनों की अनुमति होगी, लेकिन इसमें 100 से ज्यादा लोगों के शामिल होने की इजाजत नहीं होगी. इस दौरान, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग और सैनेटाइजर का उपयोग अनिवार्य होगा.

अनलॉक 4 गृह मंत्रालय ने जारी किए दिशानिर्देश
 कंटेनमेंट जोन में 30 सितंबर तक लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाएगा । इंटर और इंट्रा स्टेट मूवमेंट पर अब कोई रोक नहीं होगी। किसी को भी देश में कहीं भी जाने के लिए अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी  सभी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। सोशल डिस्टेंसिंग रखना होगी। दुकानों पर ग्राहकों के बीच भी सोशल डिस्टेंसिंग रखना अनिवार्य है। इस पर गृह मंत्रालय खुद निगरानी रखेगा।
65 साल से ऊपर के लोगों, 10 साल की आयु से नीचे के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, अन्य घातक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को जब तक जरूरी न हो बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है।

राज्य सरकारें अब बिना केंद्र सरकार की अनुमति के स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन नहीं लगा पाएंगे। केवल कंटेनमेंट जोन में ही लॉकडाउन लगा सकेंगे।21 सितंबर से ओपन एयर थिएटर खोलने की अनुमति होगी। 30 सितंबर तक स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। इस समय तक ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा।कंटेनमेंट जोन के बाहर 21 सितंबर से अनुमति मिल सकती है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय अलग से एसओपी जारी करेगा। सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित सरकारें स्कूल और कॉलेजों में 50% टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को बुला सकते हैं।

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Vodafone Idea shares jumped 17.5%

 नई दिल्ली: तीन दिन की गिरावट के बाद वोडाफोन आइडिया के शेयरों में शुक्रवार को तेजी लौटी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले वोडाफोन आइडिया के शेयरों ने 17.5 प्रतिशत तक की छलांग लगाई. कंपनी को एजीआर मामले में अच्छे नतीजों की उम्मीद है .शुक्रवार को सप्ताह के अंतिम दिन कंपनी के शेयर 17.5 प्रतिशत की छलांग लगाकर 10.43 रुपये तक पहुंच गए. हालांकि, दोपहर 12.30 बजे, शेयरों की कीमत 10.15 रुपये पर आ गई


जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "मामला अभी कोर्ट में हैं और लोगों की आंखों फैसले परे है. बाजार में इस फैसले को लेकर मिला-जुला रुख है. कई लोग राहत दिए जाने के पक्ष में हैं. फैसले की उम्मीद लगाई जा रही है."न्यानमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ जल्द फैसला सुना सकती है. इसमें कंपनियों को एजीआर भुगतान के लिए 15-20 साल की एक्सटेंशन शामिल है. साथ ही स्पेक्ट्रम को दिवालियानप के दायरे और अतिरिक्त देनदारी के मामले में भी फैसला आ सकता है.


रिलायंस जियो और भारती एयरटेल की भी नजरें इस फैसले पर होंगी क्योंकि उन्हें रिलायंस कम्युनिकेशंस, वीडियोकॉन व एयरसेल के स्पेक्ट्रम का भुगतान करना पड़ सकता है.नायर ने कहा कि पहले के महीनो की तुलना में मई में कंपनी सब्सक्राइबर्स की संख्या बेहतर रही. मई में कंपनी ने 47 लाख ग्राहक गंवाए. वोडाफोन आइडिया के पास कुल 30.9 दस लाख ग्राहक हैं. उन्होंने कहा, "यह ठीक है. कंपनी ज्यादा ग्राहक नहीं गंवा रही हैं. इसे अच्छा संकेत मानना चाहिए.

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Thursday, August 27, 2020

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में मोदी सरकार से सस्ता में सोना खरीदने का आखिरी मौका

मोदी सरकार एक बार फिर आपके लिए सस्ता सोना खरीदने का मौका दे रही है। इस साल आपके लिए यह आखिरी मौका होगा। सरकार द्वारा जारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का सब्सक्रिप्शन 31 अगस्त से लेकर 4 सितंबर के बीच लिया जा सकता है। इसकी किस्त 8 सितंबर को जारी की जाएगी। सॉवरेन गोल्ड बांड में निवेशक को फिजिकल रूप में सोना नहीं मिलता। यह फिजिकल गोल्ड की तुलना में अधिक सुरक्षित है।

1. मोदी सरकार छठी और इस साल आखिरी बार गोल्ड बॉन्ड लेकर आ रही है। वह भी तब जब घरेलू कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच रही हैं। 54000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच कर रिकॉर्ड बना चुका सोना पिछले कई दिनों से नीचे की ओर जा रहा है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि दीवाली तक यह 64000 से 82000 रुपये तक पहुंच सकता है।

2. सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सॉवरेन गोल्ड बांड जारी किए जाते हैं। भौतिक सोने की मांग को कम करने और वित्तीय बचत में घरेलू बचत के एक हिस्से को स्थानांतरित करने के उद्देश्य से 2015 में सॉवरेन गोल्ड बांड योजना शुरू की गई थी। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा 999 शुद्धता वाले सोने के लिए Latest closing प्राइस के आधार पर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स का मूल्य तय किया जाता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम में एक वित्तीय वर्ष में एक व्यक्ति अधिकतम 500 ग्राम सोने के बॉन्ड खरीद सकता है। वहीं न्यूनतम निवेश एक ग्राम का होना जरूरी है।

3. 31 अगस्त से 4 सितंबर के बीच सोने के बॉन्ड की इस किस्त की जारी करने की तारीख तय की गई है।

 बांड जारी होने के पखवाड़े के भीतर स्टॉक एक्सचेंजों पर तरलता के अधीन हो जाते हैं।

 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानि आरबीआई ने अप्रैल में घोषणा की थी कि सरकार सितंबर तक छह ट्रेंच में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करेगी। इसकी सबसे खास बात होती है कि निवेशक को सोने के भाव बढ़ने का लाभ तो मिलता ही है, साथ ही उन्हें इन्वेस्टमेंट रकम पर 2.5 फीसद का गारंटीड फिक्स्ड इंटरेस्ट भी मिलता है।


इन बॉन्ड्स की अवधि 8 साल की होती है और 5वें साल के बाद ही प्रीमैच्योर विड्रॉल किया जा सकता है। इस पर तीन साल के बाद लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा (मैच्योरिटी तक रखने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा) वहीं इसका लोन के लिए  इसका उपयोग कर सकते हैं।

सोना किस भाव पर मिलेगा 

वहीं ऑनलाइन खरीदने पर इस पर 50 रुपये प्रति ग्राम या 500 रुपये प्रति 10 ग्राम की छूट मिलेगी। SGB को बैंकों (स्मॉल फाइनेंस बैंकों और पेमेंट बैंकों को छोड़कर), स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (Stock Holding Corporation of  India ltd), नामित डाकघरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों (National Stock Exchange of India और Bombay Stock Exchange) के माध्यम से बेचा जाएगा। 

सॉवरेन गोल्ड बांड क्या है

सॉवरेन गोल्ड बांड में निवेशक को फिजिकल रूप में सोना नहीं मिलता। यह फिजिकल गोल्ड की तुलना में अधिक सुरक्षित है। जहां तक शुद्धता की बात है तो इलेक्ट्रॉनिक रूप में होने के कारण इसकी शुद्धता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता। इस पर तीन साल के बाद लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा (मैच्योरिटी तक रखने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा) वहीं इसका लोन के लिए  इसका उपयोग कर सकते हैं। अगर बात रिडेंप्शन की करें तो पांच साल के बाद कभी भी इसको भुना सकते हैं।

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Note :-स्टॉक्स से जुड़े सलाह विशेषज्ञों द्वारा दिए गए हैं। इन स्टॉक्स में निवेश से पहले अपने इंवेस्टमेंट विशेषज्ञों की राय जरूर लें।

Wednesday, August 26, 2020

LIC Housing Finance Ltd share price target

 नई दिल्ली, पीटीआइ। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) के शेयर में मंगलवार को भारी उछाल दर्ज किया गया है। कंपनी के शेयर में मंगलवार को 8 फीसद का उछाल दर्ज किया गया है। कंपनी  मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही का परिणाम जारी करने के बाद शेयर में यह उछाल दर्ज किया गया है। कंपनी ने 30 जून को समाप्त हुई तिमाही में अपने शुद्ध लाभ में 34 फीसद का उछाल दर्ज किया है। Bombay Stock Exchange पर कंपनी का शेयर (LICHFL Share Price) मंगलवार को 8.06 फीसद के उछाल के साथ 299 रुपये पर बंद हुआ है।


ट्रेडिंग के दौरान मंगलवार को कंपनी का शेयर 11.45 फीसद की उछाल के साथ 308.40 तक गया था। वहीं, एनएसई पर कंपनी का शेयर 8 फीसद की बढ़त के साथ 298.95 पर बंद हुआ है। अगर मात्रा के हिसाब से देखें, तो मंगलवार को बीएसई पर कंपनी के 21.07 लाख शेयर और एनएसई पर 4 करोड़ से अधिक शेयर ट्रेड कर रहे थे।
कम प्रोविजनिंग की मदद से 30 जून को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी के शुद्ध लाभ में 34 फीसद का उछाल आया है, जिससे यह 817.48 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का लाभ टैक्स के बाद 610.68 करोड़ रुपये रहा था।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सिद्धार्थ मोहंते ने कहा, 'लाभ में वृद्धि मुख्य रूप से प्रोविजनिंग के कारण हुई है, जो पिछली बार (Q1 FY20) की तुलना में वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में कम थी।' अप्रैल-जून 2020 में कंपनी की कुल आय बढ़कर 4,977.49 करोड़ रुपये आ गई है। यह एक साल पहले की समान तिमाही में 4,807.21 करोड़ रुपये थी।,

LIC Housing Finance Ltd share price target 350 6 month

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Note :-स्टॉक्स से जुड़े सलाह विशेषज्ञों द्वारा दिए गए हैं। इन स्टॉक्स में निवेश से पहले अपने इंवेस्टमेंट विशेषज्ञों की राय जरूर लें।

Tuesday, August 25, 2020

क्या 2000 रुपए का नोट बंद होने वाला है ?

 2000 रुपये के नोट को लेकर लगातार खबरें आती रहती है. भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते एक साल में उन्होंने 2000 रुपये का एक भी नया नोट नहीं छापा है.इस वित्त वर्ष में नहीं छपे 2000 रु के नोट,तो क्या भारतीय रिजर्व बैंक बंद करने वाली है क्या 2000 रुपए का नोट बंद होने वाला है ?

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि साल 2019-20 में 2000 रुपये के नोट की छपाई नहीं की गई है. बीते सालों में भी 2000 रुपये के नोट का सर्कुलेशन भी कम हुआ है. 2000 रुपये के नोट का प्रसार मार्च 2018 के अंत में 33,632 लाख था जो मार्च 2019 के अंत तक घटकर 32,910 लाख पर आ गया. आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2020 के अंत तक 2000 रुपये के नोट का सर्कुलेशन 27 398 मिलियन करने के लिए गिर गया है।

2000 रुपये के नोट को लेकर सरकार दे चुकी हैं सफाई- वित्त और कारपोरेट मामलों के राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सोशल मीडिया पर छाई 2000 रुपये के नोट को बंद करने की खबरों का खंडन करते हुए कहा था कि 'सरकार की फिलहाल 2,000 रुपये का नोट बंद करने की कोई योजना नहीं है.

इकॉनमी में व्यापक सुधारों की जरूरत

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा है कि कोविड-19 के बीच भारत को एक स्थिर वृद्धि की राह पर लौटने के लिए गहरे और व्यापक सुधारों की जरूरत है. केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि इस महामारी की वजह से देश की संभावित वृद्धि दर की क्षमता नीचे आएगी. केंद्रीय बैंक के आकलन और संभावनाओं में कहा कि कोविड-19 ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से तोड़ दिया है. भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था के आकार के इस तथ्य पर निर्भर करेगा कि क्या महामारी के फैलाव कैसा रहता है, और महामारी कब तक रहती है और कब तक इसके इलाज का टीका आता है. केंद्रीय बैंक का 'आकलन और संभावनाएं 2019-20’ की वार्षिक रिपोर्ट का हिस्सा हैं.

रिजर्व बैंक ने कहा कि एक बात जो उभरकर आ रही है, वह यह है कि कोविड-19 के बाद की दुनिया बदल जाएगी और एक नया सामान्य सामने आएगा. रिजर्व बैंक ने कहा कि महामारी के बाद के परिदृश्य में गहराई वाले और व्यापक सुधारों की जरूरत होगी. उत्पाद बाजार से लेकर वित्तीय बाजार, कानूनी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के मोर्चे पर व्यापक सुधारों की जरूरत होगी. तभी आप वृद्धि दर में गिरावट से उबर सकते हैं और अर्थव्यवस्था को आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के साथ मजबूत और एक स्थिर वृद्धि की राह पर ले जा सकते हैं.


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